प्रशासन, पुलिस को सीधी चुनौती…7 ताला काटकर चोर ने दिखाया दम…कम्पोजिट बिल्डिंग बना असामाजिक तत्वों का अड्डा

कम्पोजिट बिल्डिंग पर असामाजिक तत्वों का अतिक्रमण

बिलासपुर—कलेक्टर कार्यालय स्थित पुरानी कम्पोजिट बिल्डिंग पिछले एक दशक से ढेले खोमचे वालों समेत असामाजिक तत्वों का ऐशगाह बन गया है। साफ सफाई के नाम पर जमकर उगाही होती तो है..लेकिन सफाई कहीं नजर नहीं आती। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रिश्तेदारों को लाकर बिल्डिंग के आगे पीछे की सड़क पर अतिक्रमण कर दुकान चलवाने में मस्त हैं। नाम नहीं छापने की सूरत पर कम्पोजिट बिल्डिंग के एक कर्मचारी ने बताया कि बिल्डिंग की दोनो तरफ चहेते लोग अवैध निर्माण कर दुकान संचालन कर रहे हैं। तथाकथित कर्मचारी दुकानदारों से जमकर वसूली करते हैं। खासकर पीडब्लूडी और महिला बाल विकास कार्यालय की तरफ जाने वाली सड़क पर अवैध निर्माण कर दुकानों का अवैध संचालन किया जा रहा है।  दुकान संचालन या तो कर्मचारियों के अपने कर रहे हैं या फिर किसी रसूखदार के प्रभाव में हो रहा है। दुकानदारों की मनमानी से असमाजिक तत्वों के हौसले बुलन्द हैं। जिसका जीता जागता नमूना मंगलवार को जिला पंजीयन कार्यालय में देखने को मिला है।

सात ताला तोड़ा गया

मंगलवार को विभाग को अच्छी तरह जानने और समझने वाले ने जिला पंजीयन कार्यालय का ताला तोड़ा है। यद्यपि विभाग को सात ताला के अलावा कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। लेकिन सवाल उठना उचित है कि आखिर तथाकथित कड़ी सुक्षा के बीच अज्ञात चोर में पंजीयन कार्यालय का ताला काटने की हिम्मत  कैसे आयी। सच तो यह है कि ताला तोड़कर कार्यालय में घुसना किसी बड़ी साजिश को इशारा करता है।

प्रशासन को चुनौती

बताते चलें कि पंजीयन कार्यालय के पहले भी कम्पोजिट बिल्डिंग में इस प्रकार की घटना एक दो बार नहीं बल्कि कई बार हो चुकी है। हर बार खामियों को दूर करने की बात सामने आयी। लेकिन सामने आकर चली भी गयी। ताला तोड़ने की घटना के मात्र 6 घंटा पहले ही कलेक्टर और एसपी ने संयुक्त बैठक कर अधिकारियों को कानून व्यवस्था पाठ पढ़ाया था । लेकिन सारे पाठ..पाठशाला तक ही रह गया। रात होते ही पुलिस के नाक के नीचे चोर ने पंजीयन विभाग पर धावा बोलकर व्यवस्था के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दिया है।

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असाजिक तत्वों का अड्डा

कम्पोजिट बिल्डिंग का दूसरा नाम पिछले दशक से असामाजिक तत्वों का अड्डा है। बिल्डिंग की छत पर आज भी चरस गांजा शराब पीने वालों का प्रमाण देखे जा सकते हैं। दिन हो या रात बिल्डिंग का ग्रिल नहीं लगता है। बिल्डिंग में रात और दिन कर्मचारियों से ज्यादा अवारा मवेशियों और आसामजिक तत्वों का जमावाड़ा रहता है।

अपनों से करवाया अतिक्रमण

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्री विभाग और उपभोक्ता फोरम की तरफ जाने वाली सड़क पर लोगों ने अवैध कब्जा कर दुकान बना लिया है। दुकान बनवानें में सरकारी कर्मचारियो की ही भूमिका है। दुकान बनाने वालों में कुछ अपने तो कुछ रसूखदारों के रिश्तेदार शामिल हैं। सभी दुकानदार विभाग के कर्मचारी को महीने का किराया चुकाते हैं। एवज में कर्मचारी दुकानदारों  के अवैध कारोबार को सुरक्षा मिलती है।

कलेक्टर ने किया था निरीक्षण

जानकारी देते चलें कि दो सप्ताह पहले रिमझिम बारिश के बीच कलेक्टर अवनीश शरण दल बल के साथ पुरानी कम्पोजिट बिल्डिग का भ्रमण किया था। उन्होने इस दौरान बेतरतीब दुकानों का हटाने का आदेश दिया। निगम को आदेश दिया कि सभी के लिए चबूतरा बनाकर व्यवस्थित किया जाए। यद्यपि कम प्रगति पर है। लेकिन दुकानदारों को विश्वास नहीं है कि उन्हें हटाया भी जाएगा। क्योंकि इसके पहले आधा दर्जन से अधिक कलेक्टरों ने इसी प्रकार का आदेश दिया था। लेकिन हुआ कुछ नहीं।

वेलफेयर के नाम पर वसूली

कम्पोजिट बिल्डिंग विभागीय कर्मचारी के अनुसार कुछ तथाकथित कर्मचारी दुकानदारों से कर्मचारी वेलफेयर के नाम पर किराए वसूलते है। वसूली का काम दशकों से हो रह ाहै। यदा कदा कार्रवाई के दौरान कुछ दुकान हटाए भी गए। बावजूद इसके किराए की वसूली होती रही।  सिर्फ इसलिए कि कोई दूसरा दुकानदार जगह पर कब्जा ना कर ले।

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ना साफ ना सफाई..ना चौकीदार..लाइट भी नहीं

 कम्पोजिट बिल्डिंग में साफ सफाई के नाम पर सिर्फ गंदगी ही गंदगी है। मूत्रालय का गंदा पानी बिल्डिंग के फर्श पर रात दिन बहता है। कहीं जानवर तो कही..भिखारी बैठे नजर आते हैं। रात में लाइट की भी व्यवस्था नहीं है। कम्पोजिट बिल्डिंग में घुसने के लिए बनाए गए चारो तरफ के दरवाजों में ग्रिल है। लेकिन लगता कभी नहीं है। कई ग्रिल तो दशकों से खोले ही नहीं गए हैं। फायदा उठाकर प्रवेश द्वार पर ही दुकानदारों ने कब्जा कर लिया है। मजेदार बात है कि जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी अन्जान है। समझ सकते हैं ऐसा क्यों है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।वर्तमान में CGWALL में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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